मुक्तक

1.
हम ने कई बार पलट कर देखा था उसे
दिल ने यूँ ही सूरज कह दिया था जिसे !
/
तेरी तलाश में मैं कहीं भी नहीं हूँ सखे
मैं हर जगह हूँ
बस तेरे हाथों की लकीरों में नहीं
***
…सिद्धार्थ
2 .
था भरा उपवन सारा रंग बिरंगी फूलों से
मैंने तुम को चुना था…
कि रख लूं हिय पास बचा कर तुमको शूलों से !
***
…सिद्धार्थ
3.
एतबार सांसो का नहीं तेरी यादों पे है,
जो तूने कभी किया नहीं उन्हीं वादों पे है !
***
…सिद्धार्थ

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