मुक्तक · Reading time: 1 minute

मुक्तक

ख़ुदा से डर नही है जब इबादत छोड़ दो अब तो,
हटा लो तख़्त से नज़रें शरारत छोड़ दो अब तो,
जनेउ औ तिलकधारी, कभी टोपी की नौटंकी
धरम के नाम पर करनी सियासत छोड़ दो अब तो

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