.
Skip to content

मुक्तक

MITHILESH RAI

MITHILESH RAI

मुक्तक

January 25, 2017

हौसला मैं चाहत का बुलन्द रखता हूँ!
दर्द को पलकों में नजरबंद रखता हूँ!
कहीं ख्वाब खो न जाऐं हसीन लम्हों के,
हर याद को मैं जिगर में बंद रखता हूँ!

#महादेव_की_कविताऐं’

Author
MITHILESH RAI
Recommended Posts
मुक्तक
अपनी तमन्नाओं पर मैं नकाब रखता हूँ! धड़कनों में यादों की मैं किताब रखता हूँ! हर घड़ी तड़पाती है मुझे तेरी गुफ्तगूं, दर्द तन्हा रातों... Read more
लम्हा...
लम्हा.... न ज़िस्म रखता हूँ मैं न पर रखता हूँ ...मैं कहाँ कभी दिल में ज़ह्र रखता हूँ .....एक नन्हा सा लम्हा हूँ वक्त का... Read more
मुक्तक
खुद की तरह जीने का जूनून रखता हूँ! दिल में अरमानों का मज़मून रखता हूँ! अभी हौसला जिन्दा है पाने का तुमको, खुद में तूफानों... Read more
मुक्तक
तेरे हुस्न का मैं अफसाना लिए रहता हूँ! तेरे प्यार का मैं नजराना लिए रहता हूँ! मैं रोक नहीं पाता हूँ यादों का कारवाँ, तेरे... Read more