मुक्तक · Reading time: 1 minute

मुक्तक

जब धुप की चाँदी जम कर सर पे बरसेगी
साया भी अपने दामन से लिपटने को तरसेगी
/
खिली धुप में तुम पुर्दिल सबनम सा मोती रख देना
मोती तुम को कह कर के, साया बन पैरों में खेलूंगी !

***
हर पल में है तू प्यार बनके, हर लम्हें में करार बनके
कोई लम्हा ऐसा गुजरता नहीं जिस में तेरी याद न हो
तू हो के न हो सांसो में महकता है फ़रियाद बन के !

***
…पुर्दिल…

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