मुक्तक · Reading time: 1 minute

मुक्तक

कोशिश की जरा हँसने की तो तुमने रुला डाला,
ग़मों की आग मे फिर से मुझे तुमने जला डाला,
सजाए मौत तुमने इस तरह से दे दिया हमको
रही सांसे मेरी बाकी मगर खुद को भूला डाला

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