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मुक्तक

Bharti Jain

Bharti Jain

कविता

January 19, 2017

एक मुक्तक
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इस कहानी में कोई मोड़ तो आया होता।
दर्द अपना कभी अश्कों में छिपाया होता।
मैं बसा लेती तुझे दिल की हर इक धड़कन में।
दीप इक प्यार का चौखट पे जलाया होता।

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भारती जैन दिव्यांशी
19/01/2017

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Author
Bharti Jain

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