मुक्तक !

टेढ़े-मेढे रास्ते मैंने अपने वास्ते खुद ही चुन लिए
बेबसों की आवाज़ जो अचानक ही मैंने सुन लिए !
***
बीरान कमरे से कोई आवाज़ सी आती है
देखो तो, कोई रहता है वहाँ क्या ?
…सिद्धार्थ…

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