मुक्तक

अम्बर को चूमे है बेटी

ग़म में भी झूमे है बेटी

घर के सूने से आँगन में

बन पुरवा घूमे है बेटी

87 Views
Copy link to share
*काव्य-माँ शारदेय का वरदान * Awards: विभिन्न मंचों द्वारा सम्मानित View full profile
You may also like: