मुक्तक

मुस्कुराता, इठलाता,लगे बचपन प्यारा-प्यारा।
जीवन की जीवन्तता, मस्ती के पल ढेर सारा।
बेपरवाह, निश्चित, मासूमियत, शरारत से भरा,
ईश्वर की देन बचपन जिसे वे दिल से सँवारा।
-लक्ष्मी सिंह

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