मुक्तक

चंचल हुआ नवल भू यौवन प्रिय ।
पा स्नेहिल स्पर्श आलिंगन प्रिय।
रूप रस गंध की सरिता मचली –
करने वसंत का अभिवादन प्रिय।
-लक्ष्मी सिंह

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