मुक्तक

हे सौम्य रूपा, रूचिर वीणा वादिनी जयति जय माँ।
माँ शारदा वागीश्वरी वरदायिनी जयति जय माँ।
हे विद्या, कला, बुद्धि प्रदा, तमस हारिनी ज्योतिर्मयी –
परमेश्वरी कमल नयनी कमलासिनी जयति जय माँ।
-लक्ष्मी सिंह

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