मुक्तक

“औरों को अपने शब्द से पहचान बेहतर चाहिए,
कविताओं में उन्हें क़ब्रिस्तान बेहतर चाहिए,
मेरी रचना है नही मोहताज़ वाह वाही कि,
मुझको तो केवल ये हिन्दोस्तान बेहतर चाहिए “

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