मुक्तक

सदायें सुन तो ले मेरी, मैं तुझको याद करता हूँ।

मैं दश्तो-सहरा में गम की, दिन को रात करता हूँ।

जमाना कह ले जो कहना, मुझे उसकी नहीं परवाह

मोहबत में यूँ पागल हूँ खुद ही से बात करता हूँ।

Like Comment 0
Views 1

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share
Sahityapedia Publishing