मुक्तक

प्रेम की सारी संज्ञाएँ तुम्हारे नाम कर दूँगा ।

मैं अपने इश्क़ में तुझको छलकता जाम कर दूंगा ।

खुमारी इश्क़ की मेरे तिरे सर चढ़ के बोलेगी

महफिल-ए-इश्क़ में जाना मैं ऐसा काम कर दूंगा ।

Like Comment 0
Views 1

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share
Sahityapedia Publishing