मुक्तक !

“तीर तलवार कि जरूरत नहीं मुझे,
तुम्हें हो तो सँभाल लो,
मुल्क़ मुहाने पे है धर्मयुद्ध के,
हम कलम से काम चलालेंगे !”
***
07-02-2019
(सिद्धार्थ)

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