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मुक्तक

Vandaana Goyal

Vandaana Goyal

मुक्तक

January 7, 2017

गुजरे वक्त के साये जब कदमों से लिपट जाते है
यादों के कितने मौसम पल भर में पलट जाते हैं
निगाहें लगती है तकने रस्ता अनजान से राही का
गिरते है अश्क पलको से औ खुद में सिमट जाते है।
वंदना मोदी गोयल

Author
Vandaana Goyal
बंदना मोदी गोयल प्रकाशित उपन्यास हिमखंड छठा पूत सांझा काव्य संग्रह,कथा संग्रह राष्टीय पञ पत्रिकाओं में कविता कथा कहानी लेखों प्रकाशन मंच पर काव्य प्रस्तुति निवास फरीदाबाद
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