मुक्तक

“हमारे दर्द का दिल से बहुत रिश्ता पुराना है,
बहुत ग़म सह लिये हमने, ज़रा अब मुस्कराना है,
तुम्हारे और हमारे दरमियाँ इतना सा रिश्ता है,
हमें हैं इम्तिहां देने, तुम्हें बस आजमाना है “

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