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मुक्तक –सुनहरा सपना

Sajoo Chaturvedi

Sajoo Chaturvedi

कविता

July 13, 2017

धरा से आतंकियो को मिटा दो।
अहिंसा की ज्योति को जगा दो।
तीर्थयात्री जयकारा लगाते चलें,
त्रिलोकनगरी फूलों से खिला दो।
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सुगंधितकेशरक्यारियों को महका दो।
झीनीचुनरी नायिकाओं की उड़ा दो।
देवता झुके गायें बर्षा करने लगे,
खगस्वप्नो की उड़ानों से बहका दो।।
सज्जो चतुर्वेदी*****सुनहरा सपना

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