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मुक्तक – सावन कजरी

Sajoo Chaturvedi

Sajoo Chaturvedi

कविता

July 16, 2017

आईं सखियाँ गाये कजरी।
बिजुरिया मोती सी चमकी।
पिया ठाड़े दूरहि मुस्काये,
भीजी चुनरिया तनहिं लिपटी।।.
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मेंहदी रची सखी हँसती।
देखि पिया महकी कहती।
दौड़े आये झूला झूले,
देखि कहती लहकी बहकी ।।.
सज्जो चतुर्वेदी

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