सभी सम्मानजनक महापुरुषों को समर्पित रचना !!

झुकने पर ही उसकी हर रहमत उनको मिली है,
तभी तो एक सामान्य से ऊँची उनकी तस्वीर सजी है,
एक विशिष्ट प्रयास के बाद ही माला उनके गले में डली है,
अन्यथा एक आम-जन को चरणों में ही जगह मिली है,
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महेंद्र

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