Feb 15, 2021 · मुक्तक
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*मुक्तक* वो ज़िंदगी ही क्या ?

वो ज़िंदगी ही क्या जो लहरों के साथ बह जाए !
बात तो तब है लहरों के विपरीत चलके दिखाएं !!
वो जीना भी कोई जीना जैसा मिले जी लिया जाए !
जीना तो तब है पत्थर का सीना चिर के उग जाएं !!
बने बनाए रास्तों पर चलकर सफलता पाई तो क्या !
मजा तो तब है सफलता के रास्ते ख़ुद बनाए जाएं !!

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Neelam Chaudhary
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*Writer* & *Wellness Coach* ---------------------------------------------------- मकसद है मेरा कुछ कर गुजर जाना । मंजिल मिलेगी... View full profile
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