Jun 10, 2021 · कविता
Reading time: 1 minute

“मुक्तक” ( बारिश )

“मुक्तक” ( बारिश )
“””””””””””””””””””””

*बारिश* इस कदर बरसी मानो आसमाॅं ही फट गया।
बिजलियाॅं इतनी ज़ोर कड़की कि डर से ही मर गया।
कितना मनोरम दृश्य है, इन्द्रधनुष निकले हैं गगन में,
कुदरत का सुंदर नज़ारा देख कर मज़ा ही आ गया।।

_ स्वरचित एवं मौलिक ।

© अजित कुमार कर्ण ।
__ किशनगंज ( बिहार )
दिनांक : १०/०६/२०२१.
“”””””””””””””””””””””””””””
💐💐💐💐💐💐💐💐

6 Likes · 47 Views
Copy link to share
#4 Trending Author
Ajit Kumar Karn
43 Posts · 3.1k Views
Follow 15 Followers
Accountant Civil Court View full profile
You may also like: