मुक्तक :-- चूड़ियां ।।

मुक्तक :– चूड़ियां ॥

हरी या लाल पहनों तुम हमें हर रंग प्यारा है ।
भरे जौवन में तो इनका दहकता अंग प्यारा है ।
कभी ये रूठ जाती हैं कभी ये खिलखिलाती हैं ,
तुम्हारी चूड़ियों के बोलने का ढंग प्यारा है ।।

अनुज तिवारी “इंदवार”
स्वरचित

Like 1 Comment 0
Views 168

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share