मुक्तक :-- चूड़ियां ।।

मुक्तक :– चूड़ियां ॥

हरी या लाल पहनों तुम हमें हर रंग प्यारा है ।
भरे जौवन में तो इनका दहकता अंग प्यारा है ।
कभी ये रूठ जाती हैं कभी ये खिलखिलाती हैं ,
तुम्हारी चूड़ियों के बोलने का ढंग प्यारा है ।।

अनुज तिवारी “इंदवार”
स्वरचित

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 1 Comment 0
Views 164

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share