मुक्तक · Reading time: 1 minute

मुक्तक :– चाहतें महफिल में भी मुस्कान की प्यासी रही !!

मुक्तक :– चाहतें महफिल में भी मुस्कान की प्यासी रही !!

चाहतें महफिल में भी मुस्कान की प्यासी रही !
साँस ! मेरी हर पहर अहसान की प्यासी रही !
प्यार से जिसको नवाजा उम्र भर एक आस में ,
वो तो हमदम हमनसी शमशान की प्यासी रही !!

अनुज तिवारी “इन्दवार”

10 Comments · 234 Views
Like
118 Posts · 58.7k Views
You may also like:
Loading...