मुक्तक- उनकी बदौलत ही...

मुक्तक- उनकी बदौलत ही…
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कहीं मैं दूर जाऊँ तो मुझे वो घर बुलातीं हैं,
रहूँ घर पे जो मैं दिन-रात बस पत्थर बुलातीं हैं,
मगर उनकी बदौलत ही कलम चलती है यह मेरी,
मैं लिखना भूल जाऊँ तो मुझे कविवर बुलातीं हैं।

– आकाश महेशपुरी
दिनांक- 10/07/2019

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