मुक्तक · Reading time: 1 minute

“मुक्तक”(नारी और पुरुष)..

*मुक्तक*

नारी अब बहुत कम ही बची है।
ये अब, सिर्फ “नारा”हो गया है।
अच्छे पुरुष भी कम ही दिखते,
लगता ये सब बेचारा हो गया है।…..✍️

स्वरचित सह मौलिक
पंकज कर्ण
कटिहार।

3 Likes · 2 Comments · 257 Views
Like
You may also like:
Loading...