मुकम्मल ये घर नहीं

जिंदगी 100 बरस , पल की खबर नहीं
मश्गूल है जहां में, खुद की खबर नहीं
नेकी क्या बदी है,रखता नजर नहीं
खुदगर्जीयों में उलझा, दीन ए असर नहीं
न संजीदगी न बंदगी, न फर्जे अदाएगी
न मौत की खबर , एक दिन उठा ले जाएगी
ये है जगत का मेला,हर शख्स है अकेला
कर्मों है झमेला, कोई गुरु न चेला
फानी है ये दुनिया, मुकम्मल ये घर नहीं
जन्नत मिले या दोजख, खुदा का भी डर नहीं
सुरेश कुमार चतुर्वेदी

3 Likes · 8 Comments · 51 Views
Copy link to share
मेरा परिचय ग्राम नटेरन, जिला विदिशा, अंचल मध्य प्रदेश भारतवर्ष का रहने वाला, मेरा नाम... View full profile
You may also like: