मील का पत्थर

समय व नियति का दौर
कुछ ऐसा चल रहा है,
यथार्थ-
पागल करार दिया गया है
फिर भी,
संसार ऐसे ही पागलों
की अनचाही कब्रों पर
अपनी नींव रखे हुआ है.
यह विचित्र दौर
कबतक चलेगा ?
अंधकार पर
प्रकाश की विजय
कब यथार्थ में परिणित होगा.
यह चिंता
और चिंतन का बिंदु है
चिंता इसलिए-
यथार्थ पागल करार दिया गया है
चिंतन इसलिए-
पागलपन के लिए कौन जिम्मेदार है ?

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विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में 1000 से अधिक लेख, कहानियां, व्यंग्य, कविताएं आदि प्रकाशित। 'कर्फ्यू में शहर'...
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