मुक्तक · Reading time: 1 minute

*मीरा*

मीरा थी इक प्रेम दीवानी
चाहत उसकी अजब नूरानी
अपनी सच्ची प्रीत के कारण
गाथा है वो एक सुहानी

*धर्मेन्द्र अरोड़ा*

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