कविता · Reading time: 1 minute

*जीने की वजह मिल गई*

बेवजह ये जिंदगी जा रही थी ,
मिले जो तुम तो जीने की वजह मिल गई ।
खो गई थी ये खुशियाँ कहीं वीराने में ,
मिले जो तुम तो खोजने की वजह मिल गई ।।

छिन ली थी हँसी इस ज़माने ने ,
मिले जो तुम तो हँसने की वजह मिल गई ।
हम भी जिएंगे अब जिंदगी जी भर के ,
हमको तेरे प्यार की जो मदद मिल गई ।।

सोचा ना था की हम भी जिएंगे कभी ,
मिले जो तुम तो नई सहर मिल गई ।
बेवज़ह भटकती इस जिंदगी को ,
ख़ुशियों की नई लहर मिल गई ।।

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