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मिला हूँ जो तुझमे, तो तेरी छवि हो गया हूँ ..

Neeraj Chauhan

Neeraj Chauhan

मुक्तक

December 12, 2016

मिला हूँ जो तुझमे, तो तेरी छवि हो गया हूँ
ढलते उजालों का जैसे, मैं रवि हो गया हूँ
कोई कहता हैं पागल, कोई कहता दीवाना,
लोग देते हैं ताना, की कवि हो गया हूँ ..

– नीरज चौहान

Author
Neeraj Chauhan
कॉर्पोरेट और हिंदी की जगज़ाहिर लड़ाई में एक छुपा हुआ लेखक हूँ। माँ हिंदी के प्रति मेरी गहरी निष्ठा हैं। जिसे आजीवन मैं निभाना चाहता हूँ।
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