मिलन-सुख की गजल-जैसा तुम्हें फैसन ने ढाला है

आपकी जुल्फें चाँदी-सीं रंग उन पर अति काला है |
मिलन-सुख की गजल-जैसा तुम्हें फैसन ने ढाला है |

बुढापे की मस्त झुर्रीं, दे रहीं हैं आहट सँभलो |
इसलिए मेकप करवाया ,उजाला ही उजाला है |
मिलन-सुख की गजल-जैसा तुम्हें फैसन ने ढाला है |

तुम,अनुभव की शुभ ऑधी ,आपका दिल पूरणमासी
सदृश खिलते हुए पावन चंद्रमाओं की माला है |
मिलन-सुख की गजल-जैसा तुम्हें फैसन ने ढाला है |

बुढापे में जवानी का सुहावन अभिनय है जीवन |
मुस्कुराया-हँसा दिलवर, मिटा दिल का हर छाला है |
मिलन-सुख की गजल-जैसा तुम्हें फैसन ने ढाला है |

आपकी जुल्फें चाँदी-सीं रंग उन पर अति काला है |
मिलन-सुख की गजल-जैसा तुम्हें फैसन ने ढाला है |
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卐-उक्त गजल दिल्ली से प्रकाशित, ‘ हिंदी सागर पत्रिका ‘ वर्ष 02 अंक-01,माह जनवरी-मार्च 2018 में प्रकाशित है |

卐-उक्त गजल को मेरे फेसबुक पेज
पर भी पढा जा सकता है |

卐-इस रचना को मेरी कृति जागा हिंदुस्तान चाहिए के द्वितीय संस्करण में भी पढ़ा जा सकता है। जागा हिंदुस्तान चाहिए कृति का द्वितीय संस्करण सम्पूर्ण विश्व में अमेजोन एवं फ्लिप्कार्ट पर उपलब्ध हैं।

बृजेश कुमार नायक
Subhash nagar ,konch
Dist -Jalaun
UP-28525
(nr Kedarnath doorwar school)
What S aap -9956928367

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