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मिलन की अजीब दास्तान

मिलन की अजीब दास्तान
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न सोचा था,न समझा था,
दोनों ने अजनबी राहे पकड़ी।
न देखा था,न भाला था हमने,
दोनों ने अजनबी बाहे पकड़ी।
कैसा ये अजीब इतफाक था,
दोनों एक दूजे से अपरिचित थे।
फिर भी दोनों ने एक साथ,
प्रेम मिलन की राहें पकड़ी ।।

न देना धोखा तुम मुझको ,
न धोखा मै दूंगा तुमको।
चलते रहेंगे हम साथ दोनों,
ये राहें तब आसान होगी।
पकड़ना तुम मेरा हाथ,
पकडूंगा मै तेरा हाथ।
चलते रहेंगे हम दोनों,
ये जिंदगी आसान होगी।।

न हूंगा मै तुझसे जुदा,
न तुम होना मुझसे जुदा।
करते है हम दोनों ये वादा,
ये जिंदगी चलती रहेगी,
मै तुझ पर हूं फिदा,
तुम मुझ पर है फिदा,
चलते रहेंगे हम साथ दोनों,
ये मंजिल सदा चलती रहेगी।।

न तुम बेवफा होना,
न मै भी बेवफा हूंगा,
न तुम नाराज होना,
न मै भी नाराज हूंगा,
अगर हो जाए नाराज,
एक दूजे को मना लेना।
इस तरह जिंदगी को तुम,
तुम बहुत रंगीन बना लेना।।

आर के रस्तोगी गुरुग्राम

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