कविता · Reading time: 1 minute

*मिलते है आजकल*

*मिलते है आजकल*

चंद सिक्कों की चमक खनक के आगे,,
ईमान डमाडोल करते है लोग आजकल,,

वो एक गरीब है जो लाखो का तनबदन,,
ईमान खातिर लगाता है मजूरी में आजकल,,

बेशक वो धनवान नही है नजर में जमाने की,,
वो ही एक अच्छा बचा है उसकी नजर में आजकल,,

सफेदी भले ही उसके लिबाज पर उतनी नही है,,
पर मन आज सिर्फ उसका ही उजला है आजकल,,

आदमियों की बस्तियों में रहकर ये जाना मनु,,
कुत्ते और दरबान ही मिलते है आजकल,,
*मानक लाल मनु*

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