मिलते हैं गुरु से हमें ज्ञान भरे भण्डार

कुंडलिया
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मिलते हैं गुरु से हमें ज्ञान भरे भण्डार
जीवन में अनमोल है,मिलना गुरु का प्यार
मिलना गुरु का प्यार,बना देते ये जीवन
मान इन्हें भगवान,नमन करता उनको मन
सुनो अर्चना बात,कमल कीचड़ में खिलते
भटक गए कुछ लोग , मगर सच्चे भी मिलते

2
हरियाली से कर लिया , कुदरत ने श्रृंगार
दरिया को दर्पण बना , खुद को रही निहार
खुद को रही निहार , सोच कर यही लजाती
भेजेगा अब चाँद, प्रेम की फिर इक पाती
रूप अर्चना देख ,हुई है रुत मतवाली
नीली चादर ओढ़ ,खिली देखो हरियाली

डॉ अर्चना गुप्ता

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