Sep 9, 2016 · शेर
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मिरी ख़ुश्बू

रखना सहेज कर उसे जिसको संवारो तुम,
हर किसी को हमसा बिखेरा नहीं जाता।।

जो बूझे मुझे कोई तो बस इतना ही बताना,
वो रेत का कतरा मिट्टी में मिल गया।।

सजाना हाथ मेहँदी के तो मुझको याद कर लेना,
मिरी ख़ुश्बू को मेहँदी में तू महसूस कर लेना।।

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Rajan Kaushik (Yagya)
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I am a young poet from district Bijnor (U.P.). I am writing since 2009. I... View full profile
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