मुक्तक · Reading time: 1 minute

मित्र

मित्र तो मित्र रहे, प्यारा सा साथ है,
उनके बिना, सच ! लगता अनाथ है।
खुशियां बांटना, मन का है मनोहारी,
ग़म भी बंट जाता, गर उनका हाथ है।।
मित्र वही, सदैव, सद राह दिखाता है,
कुमार्ग ले जाये, क्या मित्र कहलाता है?
मित्रता ना देखती, हैसियत मनुज की,
दौड़ते हैं कृष्ण, जब सुदामा आता है।।
मित्र तो मित्र रहे ——–
(रचनाकार :- डॉ शिव लहरी )

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