मित्रता

सभी मित्रों को “मित्रता दिवस” की
शुभकामनाएं———

मित्रता एक अक्षर नहीं…
शब्द नही…पंक्ति नहीं…
गद्य नहीं…कोई पद्य नहीं…
मित्रता तो
पवित्र “चारु” है…”आराधना” है
“अर्चना” है…”आरती” है
भावना है…एहसास है 
ठंडी शीतल पवन का एक झोंका है…!
एक-दूजे का
सम्मान है…विशवास है…
दुःख में राहत है…
कठिनाई में पथ-प्रदर्शक है…
मनुष्य के रूप में
दो तत्वों से बना फरिश्ता है…
एक सच्चाई तो दूसरा कोमलता है…
अहं, राग, द्वेष, ईर्ष्या, का हवन है…
प्रेम, सौहार्द, कर्म, ज्ञान, से निर्मित सृष्टि रूपी भवन है…

सुनील पुष्करणा “कान्त”

Like Comment 0
Views 57

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share
Sahityapedia Publishing