मित्रता (मुक्तक )

मित्र बनाते ,चलो तुम प्यारे ,
इस जीवन उलझन राहों में !
नेह का बन्धन जोड़ो सबसे,
तुम पतवार बनो मझधारों में !
तुम बनो संघाती कृष्ण के जैसे,
मैं सखा सुदामा बन जाऊं…
जब आये तेरे द्वार कभी तो
तुम भर लेना अपनी बाहों में …!!

राहुल पाल
फैजाबादी

Like 2 Comment 0
Views 6

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share