कविता · Reading time: 1 minute

मित्रता (मित्रता दिवस पर)

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मित्र हो तो कृष्ण की तरह हो
जो भले ही मित्र लिए लड़े नहीं,
पर सुनिश्चित करें कि मित्र जीत जाये।
या तो फिर मित्र कर्ण की तरह हो
जो तब भी लड़े,
जब मित्र की हार सामने दिख रही हो।

??????

मित्रहीन मनुष्य तारों के बिना आकाश
तथा पक्षियों के बिना उपवन के समान है।
सच्ची मित्रता जीवन में खजाना है,
जिसके पास सच्चा मित्र है वह सबसे धनवान है।
जो स्वयं किसी का सच्चा मित्र बना वह सच्चा इन्सान है।
सच्चा मित्र धरती पर इन्सान के रूप में भगवान है
??????—लक्ष्मी सिंह?☺

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