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** मिठास **

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

कविता

May 27, 2017

ना जाने तेरी जुबां पे

ये मिठास कहां से आती है

मिश्री घोल दे दिलों में

खरास कहां रह जाती है

ये हुनर सीखा कहां से तुमने

तेरी याद आती है

देखता हूं जिधर भी

आँखों में खालीपन-उदासी है ।

एक बार आकर तो बतलादे

ये मिठास किस दुकां से

बिन मोल लाती है।।

जहर घोला है पैमानों में शाकी ने

जीये तो कैसे न विश्वास बाकी है

अब तो जीना बाकी है ना मरना

अब ना शराब है ना शाकी है ।

?मधुप बैरागी

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Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल 13.7.2017 स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना... Read more
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