मिट्टी मेरे गांव की

मौज रही गलिया चौबारे.
वो धुल सनी कच्ची राहे.
हवाओं के संग सरसों गाए.
खेतो में सारंगी सरपत बजाए.

मौज रही गलिया चौबारे.
नहरों में पानी छलका जाए.
टुटी फुटी वो घर की यादे.
दिवारों पर रंग जामाए.

अवधेश कुमार राय…..

Like Comment 0
Views 192

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share
Sahityapedia Publishing