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*** मिआं -बीवी की नौक झोक ***

अजीत कुमार तलवार

अजीत कुमार तलवार "करूणाकर"

कविता

February 14, 2017

तेरी सूरत अब मुझ को अच्छी नहीं लगती ,
क्या खूब लगा करती थी पहले मेरी सजनी ?

वो योवन था आज बुढ़ापा है मेरे साजन,
याद रखना वो सदा नहीं रहती एक जैसी ?

तून चलती अच्छी लगती थी अब क्या हो गयी हो ?
यह देख देख कर बड़ी पुरानी सी लगती हो !

क्या क्या मुझे तुम कहते हो , अपना कभी देखा है
बाल काले वाला लाई थी अब देखो दर्पण कैसे लगते हो ?

बच्चे भी तुम को देख देख कहते हैं मम्मी हो गयी मोटी ,
खाती पीती सब से ज्यादा , और चलाती है हम पर सोटी !

अपना तो देखते नहीं, पेट कितना निकाल कर घूमते हो,
मोहल्ले में सारी सखिया मजाक उड़ाया करती हैं तुम्हारा

चलो छोड़ो अब लडाई न करो सर्दी ज्यादा लग रही है
बनाओ जाकर गाजर का हलवा, वो पुराणी याद आ रही है !

अरे अब तो बख्स दो नौकर कोई रख लो काम वो करेगा
बिमरियन इतनी भर दी हैं कुछ काम अब नहीं होता है !

चलो ठीक है नौकर कौन आएगा तेरे लिया इस काम का
याद नहीं तुझे अब में ही तो बचा हूँ तेरे इस काम का ??

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

Author
अजीत कुमार तलवार
शिक्षा : एम्.ए (राजनीति शास्त्र), दवा कंपनी में एकाउंट्स मेनेजर, पूर्वज : अमृतसर से है, और वर्तमान में मेरठ से हूँ, कविता, शायरी, गायन, चित्रकारी की रूचि है , EMAIL : talwarajit3@gmail.com, talwarajeet19620302@gmail.com. Whatsapp and Contact Number ::: 7599235906
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