माहिया छंद

“मधुशाला” (माहिया छंद)
************
रातों को आते हो
नींद चुरा मेरी
मुझको तड़पाते हो।

नैनों बिच तू रह दा
मधुबन सा जीवन
काँटे सम क्यों जी दा?

दिल डूब गया सजनी
आन मिलो मुझसे
मैं राह तकूँ रजनी।

चंदा बन तुम आना
रूप सजा मेरा
दर्पण में बस जाना।

जादू ऐसा डाला
जी न सकूँ अब मैं
तू पूरी मधुशाला।

डॉ. रजनी अग्रवाल “वाग्देवी रत्ना”
महमूरगंज, वाराणसी (मो.-9839664017)

1 Like · 383 Views
 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका।...
You may also like: