मुक्तक · Reading time: 1 minute

मास्क के नाम पर, पहनते नकाब हैं

मास्क के नाम पर, पहनते नकाब हैं
पहन कर वे हिजाब, छुपाए शबाब हैं
सैनैटाइजर के नाम पर,पीते शराब हैं
खुश हैं उठाईगीरे,बचकर निकलना आसान है
जारी है करोना का कहर, दुनिया परेशान है

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