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“मासूम वॉरियर्स”

“मासूम वॉरियर्स”

रोहन अपने पापा विपिन के साथ सुबह-सुबह उदास मन से स्कूल जा रहा है।
रोहन पास ही में स्थित एक इंग्लिश मीडियम स्कूल में Ist क्लास में पढ़ता है।रोहन पढ़ने में बहुत ही होशियार बच्चा है।

आज उसका स्कूल जाने का मन नही था, क्योंकि रात को रोहन ने बहुत ज्यादा पिज़्ज़ा खा लिया था और इस वजह से उसे तीन-चार उल्टियां हो गयी थी।

रात को ही डॉक्टर से दवाई दिलवायी तब आराम हुआ;पर थोड़ा सा सिर में दर्द अब भी है।

तभी रोहन की नज़र सड़क किनारे पड़े हुए कचरे के ढेर पर पड़ी।

कचरे के ऊपर एक छोटा कुत्ता लेटा हुआ पड़ा है।

रोहन पापा से-पापाजी ये छोटा पप्पी इस कचरे पर क्यों पड़ा है?

विपिन उस ओर देखते हुए-बेटा शायद ये मर गया!!

रोहन-ये तो उनमे से ही एक पप्पी है जो हमारे पास की एक दुकान के पास अपनी मम्मी(कुतिया) के साथ रहते हैं।

विपिन-हाँ,ये वही है।

रोहन-तो ये मर कैसे गया??

विपिन-शायद ठंड और भूख की वजह से।

रोहन-ठंड और भूख से?

विपिन-हाँ, बेटा।

रात को अब बहुत ठंड पड़ रही है इस पप्पी से बर्दाश्त नही हुई होगी।

दुख से रोहन की आंख भर आती है।

बात करते-करते रोहन का स्कूल आ जाता है।रोहन स्कूल के अंदर चला जाता है।पूरे दिन उसके दिमाग में उस छोटे पप्पी का ही दृश्य घूमता रहता है।

दोपहर को मम्मी उसे घर ले आती है।वो उस कचरे के ढेर की ओर देखता हुआ ही घर आता है।अब वो पप्पी वहाँ नही था।

उसे नगरपालिका वाले उठाकर ले गये थे।

रोहन की मम्मी(जया)-उसके जूते उतारते हुए,क्या हुआ रोहन?

किस सोच में हो??

रोहन-मम्मी को सुबह का किस्सा सुनाता है।

जया भी सुनकर दुखी होती है।

रोहन फ़िर सो जाता है।

चार बजे उठकर रोहन दूध पीकर होम वर्क करने बैठ जाता है।

शाम को विपिन; जो एक सॉफ्टवेयर कम्पनी में असिस्टेंट मैनेजर है,घर आता है।

विपिन-रोहन के सिर पर हाथ फेरते हुए,, और बेटा कैसा रहा आज का दिन।

सारा होम वर्क कर लिया?

रोहन-हाँजी, पापाजी।

जया, जरा चाय बनाकर लाओ,,,,और लो ये सब्जी फ्रिज में रख दो।

जया किचन में से- अभी लाई;

इतना सब्जी डाइनिंग टेबल पर रख दो।

विपिन-ठीक है।

तभी रोहन आकर पूछता है-पापाजी अगर हमे खाना नही मिलेगा तो हम भी मर जायेंगे?

विपिन….क्यों बेटा? ऐसा किसलिए पूछ रहे हो?

रोहन दुखी व भारी स्वर में-वो जो पप्पी मर गया ना भूख से, इसलिये।

तभी जया चाय लेकर आ जाती है; देख लो आज ये जब से स्कूल से आया है उस पिल्ले का ही जिक्र किये जा रहा है।

खाना भी ठीक से नही खाया।

रोहन चाय का घूट पीते हुए-बेटा सड़क पर रहने वाले जानवर ऐसे ही जीते मरते हैं।आप उनके लिये अपना मन मत दुखाओ।

पढ़ाई पर ध्यान दो।

रोहन-जी पापाजी,,,

फ़िर रात को खाना खाकर सब सो जाते हैं।रोहन को अब भी वो पप्पी याद आ रहा है।

सुबह होते ही स्कूल जाने की तैयारी शुरू हो जाती है।

जया नाश्ता बनाकर खाने लिये टिफ़िन पैक कर देती है।

रोहन अपने नाश्ते में से एक ब्रेड का पीस हाथ में पकड़कर, पापा के साथ स्कूल चल देता है।

विपिन- ब्रेड क्यों नही खायी?

वो पापाजी,ये तो मै छोटे पप्पी को दूंगा।

विपिन-वैरी गुड,,

जया,दरवाज़े पर खड़ी हुई-बाय रोहन,,, टेक केयर….

ओके मम्मी बाये!!लव यू…..

रोहन बाहर बैठे एक पप्पी और कुतिया(उसकी मां) को ब्रेड के पीस को दो हिस्से में बराबर तोड़कर डाल देता है।

दोनो खा लेते हैं।

रोहन को बड़ी खुशी और संतोष होता है।

स्कूल में रोहन अपने लंच बॉक्स से भी परांठे का आधा टुकड़ा क्लास की विंडो के बाहर बैठे एक कुत्ते को फेंक देता है,,,

दोपहर को रोहन छुट्टी के बाद घर आ जाता है।

रोहन आज बहुत खुश है।सारा होमवर्क भी एक दम कर लेता है,,

“””””अब वो रोज ऐसे ही सड़क पर रहने वाले जानवरों को खाना देना शुरू कर देता है””””

हर दिन कुछ ना कुछ खाने के लिये लेकर बाहर जाता है।

जया भी अब एक दो रोटी ज्यादा बनाती है।
जो भी खाना बचता रोहन सड़क पर गुजरते जानवरों को दे देता है।

रोहन को प्रतीक्षा रहती कि कोई जानवर सड़क से गुजरे तो उसे रोक कर कुछ खाने को दे।

आस पास के सारे जानवर उससे लगाव करना शुरू कर देते हैं;छोटा पप्पी अपनी दुम हिलाता हुआ उसके पैरो में आकर लेट जाता है।

आस-पास के जानवर रोहन को बड़ी करूणा और उम्मीद से देखते हैं।

उसे देखते ही वो उठ खड़े होते हैं।उसके पास आ जाते हैं।

रोहन को देखकर अन्य बच्चे भी खाना देना शुरू कर देते हैं।

अब कोई भी जानवर भूखा नही रहता।

एक दिन जब रोहन एक बिस्कुट का पैकेट लेकर उसे कुत्तों को खिलाने के लिये खोल रहा था तो सात-आठ बड़े और छोटे कुत्ते उसके आगे आकर एक पंक्ति में बैठ जाते हैं और क्रम से एक-एक करके बिस्कुट लेकर खा रहे हैं,बड़े ही अनुसाशन से।

विपिन को ये सब बड़ा अच्छा लगता है तो वो मोबाइल से इसका वीडियो बना लेता है और यूट्यूब पर अपलोड कर देता है।

विपिन कैपशन में लिखता है “मासूम वॉरियर मदद करते हुए।”

इस वीडियो को कई लाइक, कमैंट मिलते है और 5 हजार से ज्यादा व्यूज।

अब धीरे-धीरे बहुत से बच्चे सड़क पर रह रहे और आस पास घूमते जानवरों जैसे कुत्ता, गाय,बकरी,बन्दर आदि को खाना खिलाने में बढ़ चढ़कर योगदान देना शुरू कर देते हैं।

ये सिलसिला पक्षियों को दाना पानी देने की ओर भी चल पड़ता है।

कुत्तों के रहने के लिये घास-फूस से घर बना दिये गये।
कबूतरो, चिड़ियों के लिये घोंसले लटक चुके हैं।

छतों पर दाना पानी रखा रहता है।

सड़क किनारे एक सीमेंट के बने चौकोर गड्ढे में पानी भरा रहता है ताकि गाय,बैल आदि पशु प्यास बुझा सकें।

कोई भी पक्षी,जानवर बीमार पड़ता तो उसका ईलाज करवाया जाता।

पैसों की व्यवस्था बच्चे अपने पॉकेट मनी से करते हैं।

आस-पड़ोस में कई पक्षी टाँगे गये घोंसलों में रहना शुरू कर देते हैं।सुबह शाम पक्षियों की चहचहाहट गूंजती रहती है।

“””बच्चों का हौसला बढ़ाने के लिये विपिन अब “मासूम वॉरियर्स” नाम से एक यू टयूब चैनल बना देता है और बच्चों के सहायता करने की सारी वीडियो अपलोड करता रहता है।””””

“बच्चों ने पार्क के कोने में एक रोटी बैंक नाम लिखकर एक तख्ती लगा रखी है,जिस पर ये अपील है कि जो भी खाने से बच जाए आप उसे डस्टबिन में ना फेंके। हमे दे दें। हम आपके आभारी रहेंगे।”

वहाँ तीन गत्ते के डिब्बे रख रखें हैं;
एक रोटी ब्रेड, बिस्कुट के लिये,
एक दाल-सब्जी के लिये,
एक बचे फल-सब्जी,मिठाई आदि के लिये।

कॉलोनी के सभी लोग उस स्थान पर डिब्बों में खाना रख जाते हैं।इस तरह बची हुई खाने की चीज़ें उन्हे मिलती रहती हैं।

विपिन बच्चों की मदद करते हुए कई वीडियो बनाता है।

फ़िर “मासूम वॉरियर्स” चैनल पर डाल देता है।

लोगों को ये वीडियो बहुत ही पसंद आती हैं।

अब लाइक,व्यूज,कमेंट और शेयर कई हजारों में पहुंच चुके हैं।

सारे शहर में बच्चों की वाहवाही होती रहती है।

देशभर से भी बच्चों को सराहना मिलती रहती है।

बच्चों को कॉलोनी वाले एक कार्यक्रम में सम्मानित करते हैं।
सारे बच्चे स्टार बन चुके हैं।

रोहन को स्कूल में इस काम के लिये सम्मानित किया जाता है।
पढ़ाई में भी रोहन बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।अब वह थर्ड क्लास में आ चुका है।

रोहन की पहल अब एक जागरूकता आन्दोलन बन चुकी है। शहर के बच्चों से लेकर बड़े भी अब इस आन्दोलन में योगदान देने लगे हैं।

सारे नन्हे बच्चे किसी वॉरियर से कम ना थे।।

यू टयूब पर जो सबसे ज्यादा कमैंट मिला था, वो था-“well done-मासूम वॉरियर्स……..keep it up”……..

सादर,
धन्यवाद,

सौरभ चौधरी

Competition entry: साहित्यपीडिया कहानी प्रतियोगिता
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