कविता · Reading time: 1 minute

— मालिक तो देता है —

अकसर ऐसा सुना होगा
कि मेरे मालिक ने मुझ को
यह दिया, मेरे मालिक ने
मुझ को वो दिया
पर वो मालिक कैसा
जिस ने दिया
तो रो रो के दिया
अपने सुख की खातिर
सब सुख जो ले लेता है
कैसे मान लें हम सब
कि वो सच में मालिक होता है
जो किसी का दुःख दर्द न समझ सका
वो क्या मालिक होता है
जिस के अंदर अभिमान भरा हो
भला वो कैसा मालिक होता है
अपना अपना दिखाई दे जिस को
दूसरों का कुछ मोल न हो
ऐसे को हम भला कैसे कह दें
कि यह मालिक है
दुःख होता है ऐसे मालिक को देख कर
जो अपने लिए आराम खोज लेता है
दूसरा भला ही मरता रहे
पर वो चैन से सोता है
नहीं मानता दिल की वो मालिक है
मालिक तो वो , जो सब को सब देता है

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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