Skip to content

माला के जंगल:

Rita Singh

Rita Singh

कविता

April 5, 2017

कुछ तपस्वी से लगते हैं
शांत भाव से तप करते हैं
हरे भरे तरोताजा से
प्रफुल्लित मन से खड़े हुए हैं ।
कुछ बुझे बुझे मुरझाये से हैं
कुछ झाड़ बन चिड़चिड़ाए से हैं
विभिन्न रूप लिए अनोखे से हैं
ये माला के जंगल ।

कहीं घने घने से मिले जुले से
मित्र भाव से खड़े हुए से ।
कुछ सूखे से झाड़ी बनकर
उलझे उलझे फंसे फंसे से
मानो एक दूजे से रूठे हुए से
बैठे हैं ये माला के जंगल ।

कहीं कहीं टेढे़ मेढे़ से
ऊपर नीचे उलटे सीधे से
मोटे पतले लगते विलोम से
जाने कैसे मिले जुले से
हैं ये माला के जंगल ।

कहीं बांस के झुंड खड़े हैै
कहीं साल ,सीसम ,
सागौन मिले है
भिन्न भिन्न कुसुमों से सुरभित
मानो खुशी से सराबोर हुए हैं
ये माला के जंगल ।

डॉ रीता

(माला रेंज तराई क्षेत्र के संरक्षित जंगल हैं )

Share this:
Author
Rita Singh
नाम - डॉ रीता जन्मतिथि - 20 जुलाई शिक्षा- पी एच डी (राजनीति विज्ञान) आवासीय पता - एफ -11 , फेज़ - 6 , आया नगर , नई दिल्ली- 110047 आत्मकथ्य - इस भौतिकवादी युग में मानवीय मूल्यों को सनातन... Read more

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग से अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

साल का अंतिम बम्पर ऑफर- 31 दिसम्बर , 2017 से पहले अपनी पुस्तक का आर्डर बुक करें और पायें पूरे 8,000 रूपए का डिस्काउंट सिल्वर प्लान पर

जल्दी करें, यह ऑफर इस अवधि में प्राप्त हुए पहले 10 ऑर्डर्स के लिए ही है| आप अभी आर्डर बुक करके अपनी पांडुलिपि बाद में भी भेज सकते हैं|

हमारी आधुनिक तकनीक की मदद से आप अपने मोबाइल से ही आसानी से अपनी पांडुलिपि हमें भेज सकते हैं| कोई लैपटॉप या कंप्यूटर खोलने की ज़रूरत ही नहीं|

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you