गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

मारेगी जालिम तन्हाई

*मारेगी जालिम तन्हाई*
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दिल रोये आँख भर आई
दुखी मन से मैं दूँ दुहाई
प्रीत में सजा यही पाई
मारेगी जालिम तन्हाई

दुखी मनवा तुम्हें पुकारे
कैसे जियें बिना तुम्हारे
होते ना तुम बिन गुजारे
मिली तुम्हारी बेवफाई
मारेगी जालिम तन्हाई

जब यादें तुम्हारी आए
आँखें से अश्रु बह जाएं
भला कैसे तुम्हें मनाएं
दर्द सहने की न दवाई
मारेगी जालिम तन्हाई

गहरे गमों को ये झौंका
संभलने का ना दे मौका
जीवन प्रेम में हैं झौंका
ना मिली तेरी परछाई
मारेगी जालिम तन्हाई

पाक पवित्र है मोहब्बत
मिल जाए तेरी सोहबत
यह सबसे बड़ी है दौलत
अच्छी लगती प्रीत पराई
मारेगी जालिम तन्हाई

सुखविंद्र भाग्य का मारा
छाया है घोर अंधियारा
जीना तुम बिन ना गवारा
कैसी प्रेम अग्न लगाई
मारेगी जालिम तन्हाई

दिल रोये आँख भर आई
दुखी मन से मैं दूँ दुहाई
प्रीत में सजा यही पाई
मारेगी जालिम तन्हाई
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सुखविंद्र सिंह मनसीरत
खेड़ी राओ वाली (कैथल)

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