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“माफ कर दो..” अतुकांत रचना

Ankita Kulshreshtha

Ankita Kulshreshtha

कविता

July 19, 2016

मैं…..
कल
तुम्हारे पीछे
तुम्हारे कमरे में गई थी…
तुम तो नाराज थे न
सारी बातें करती रही
तुम्हारे सामान से
तुम्हारा बिस्तर
तुम्हारे कपड़े
बैग किताबे पेन…
करीने से सजी
अलमीरा तुम्हारी
जानती हूँ नापसंद है
तुमको बेतरतीबी…
कर दो न माफ़..
इस बार एक बार बस
मेरे बेतरतीब विचारों के लिए…
माफ कर दो न..
सुनो..
वो पीला पेन है न..
अलमीरा में रखे
ढेर सारे पेनों के बीच
उसी से लिख आई हूं
माफ़ीनामा
शाम ढलते चले आना
नुक्कड़ की दुकान पर
नीली शर्ट पहनकर ..
मुस्कुराती मिलुंगी
बालकनी में
मैं….

Author
Ankita Kulshreshtha
शिक्षा- परास्नातक ( जैव प्रौद्योगिकी ) बी टी सी, निवास स्थान- आगरा, उत्तरप्रदेश, लेखन विधा- कहानी लघुकथा गज़ल गीत गीतिका कविता मुक्तक छंद (दोहा, सोरठ, कुण्डलिया इत्यादि ) हाइकु सदोका वर्ण पिरामिड इत्यादि|
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